ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः। सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्॥13॥
Translation (HI)
तब एक साथ शंख, भेरी, नगाड़े, ढोल और गोमुख बज उठे और वह ध्वनि अत्यंत प्रचंड हो गई।
Life Lesson (HI)
युद्ध का आरंभ अक्सर ध्वनि और मनोबल के प्रदर्शन से होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग में अर्जुन और दुर्योधन के सेनापतियों के बीच युद्ध के प्रारम्भ का वर्णन किया गया है। यहाँ बताया गया है कि युद्ध का प्रारम्भ हुआ तो शंख, भेरी, नगाड़े, ढोल और गोमुख जैसे वाद्ययंत्र एक साथ बजने लगे और उस ध्वनि ने अत्यंत गर्जन और उत्साह का संदेश दिया।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि युद्ध का आरंभ अक्सर ध्वनि और मनोबल के प्रदर्शन से होता है। युद्ध के आगे उत्साह और तैयारी का महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो शंख, भेरी, नगाड़े, ढोल और गोमुख जैसे वाद्ययंत्रों के ध्वनि से प्रकट होती है। इसके माध्यम से मनोबल और उत्साह बढ़ाया जाता है ताकि सेना को युद्ध के लिए तैयार रखा जा सके।
इस श्लोक में युद्ध के आगे जो उत्साह और ध्वनि का महत्व दर्शाया गया है, वह सामाजिक और मानविक व्यवहार में भी महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि जीवन में सफलता पाने के ल