फिर जब कपिध्वज अर्जुन ने धृतराष्ट्र के पुत्रों को युद्ध के लिए व्यवस्थित देखा, तो उन्होंने अपना धनुष उठाया।
Life Lesson (HI)
धर्म के पक्ष में खड़ा योद्धा अपने कर्म के लिए पूर्ण सजगता अपनाता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के महान युद्ध के संदर्भ में वार्ता है। यहाँ अर्जुन को 'कपिध्वज' कहा गया है, जो उनका एक अन्य नाम है। युद्ध के पहले दिन, अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ विराट रूप देखा था और उसके बाद उसे युद्ध के संघर्ष से घृणा होने लगी थी।
इस श्लोक में दृष्टि से निगरानी करने के बाद, अर्जुन ने धृतराष्ट्र के पुत्रों को युद्ध के लिए तैयार पाया और उन्होंने अपना धनुष उठाया। यह एक प्रमुख क्षण है जब अर्जुन ने अपने कर्तव्य के प्रति निश्चित रूप से सजगता और समर्पण दिखाया।
इस स्थिति से हमें यह सिखाई जाती है कि धर्म के पक्ष में खड़े योद्धा अपने कर्म के लिए पूर्ण सजगता और समर्पण अपनाते हैं। अर्जुन ने इस मामूली दृष्टिकोण से भी अपने कर्तव्य का पालन किया, जिससे उसके अन्तर में संकोच और भय की अवस्था को दूर किया गया।
इस प्रकार, इस श्लोक के माध्यम से हमें यह सिखाया जाता है कि हमें अपने कर्मों में समर्पित और सजग रहन