Bhagavad Gita • Chapter 1 • Verse 5

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Chapter 1 • Verse 5

Arjuna Vishada Yoga

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः॥5॥
Translation (HI)
धृष्टकेतु, चेकितान, पराक्रमी काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और नरश्रेष्ठ शैब्य भी इस सेना में हैं।
Life Lesson (HI)
विविधता में शक्ति होती है, जब वह समान उद्देश्य से जुड़ी हो।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण वीर योद्धाओं की सैन्या का वर्णन कर रहे हैं। धृष्टकेतु, चेकितान, काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और शैब्य नामक योद्धाएं इस सेना में शामिल हैं। इनकी विविधता और पराक्रम से युक्त योद्धाएं एक साथ एकीकृत होकर एक ही उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि विभिन्न क्षमताओं और योग्यताओं वाले व्यक्तियों को एक साथ लाकर उन्हें समान लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करने से संगठन और समृद्धि में वृद्धि होती है। इससे हमें यह भी सीखने को मिलता है कि जब हम संयुक्त रूप से कोई कार्य करते हैं, तो हमारी शक्ति और सामर्थ्य में वृद्धि होती है और हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।