अर्जुन ने कहा: आप परम ब्रह्म हैं, परम धाम हैं, परम पवित्र हैं। आप शाश्वत पुरुष, दिव्य, आदि देव, अजन्मा और सर्वव्यापी हैं।
Life Lesson (HI)
परम सत्य की पहचान से भक्ति और दृढ़ होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से परम ब्रह्म, परम धाम, परम पवित्र, शाश्वत पुरुष, दिव्य, आदि देव, अजन्मा और सर्वव्यापी के रूप में अपनी महिमा का वर्णन कर रहे हैं। यह श्लोक हमें यह बताता है कि भगवान की अद्वितीयता और अमिट शक्ति को समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
भगवान का वर्णन करते समय उनकी उच्चता, शुद्धता और सर्वशक्तिमान स्वरूप को समझकर हमें उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति में वृद्धि होती है। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि परम सत्य की पहचान से हमारी भक्ति और निष्ठा मजबूत होती है और हम अपने जीवन को भगवान के प्रति समर्पित कर सकते हैं।