Bhagavad Gita • Chapter 10 • Verse 4

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Chapter 10 • Verse 4

Vibhuti Yoga

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः। सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च॥4॥
Translation (HI)
बुद्धि, ज्ञान, मोह का अभाव, क्षमा, सत्य, इंद्रिय-निग्रह, मन की शांति, सुख, दुःख, उत्पत्ति और अभाव, भय और अभय —
Life Lesson (HI)
सभी गुण और भाव, ईश्वर की ही प्रेरणा से उत्पन्न होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण गुणों और भावनाओं की महत्वपूर्णता पर चर्चा कर रहे हैं। यहाँ उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण गुणों का उल्लेख किया है जो हमें सही राह पर चलने में सहायक होते हैं। - बुद्धि: यहाँ बुद्धि का अर्थ है समझ और विवेक। हमें अपने कर्तव्यों को समझने और सही निर्णय लेने में बुद्धि की आवश्यकता होती है। - ज्ञान: ज्ञान का अर्थ है जानकारी और अनुभव। हमें सत्य का ज्ञान होना चाहिए और जीवन में सामर्थ्य और सम्पन्नता की दिशा में अध्ययन और सीखना चाहिए। - असम्मोह: यह मोह का अभाव है, जिसका अर्थ है माया के मोह में पड़कर गलत राह पर न जाना। - क्षमा: यह उदारता और क्षमाशीलता का गुण है, जिससे हम दूसरों के प्रति सहानुभूति और दया रख सकते हैं। - सत्य: सत्य का पालन करना हमें सच्चाई और ईमानदारी में सहायक होता है। - इंद्रिय-निग्रह: इंद्रियों को नियंत्रित करना और संयम बनाए रखना आवश्यक है। - मन की शांति: मन को शांत रखना और उसकी उचित स्थ