न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा। दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्॥8॥
Translation (HI)
तुम मुझे अपनी इन आँखों से नहीं देख सकते। इसलिए मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि देता हूँ — मेरे योग ऐश्वर्य को देखो।
Life Lesson (HI)
ईश्वर को देखने के लिए विशेष दृष्टि की आवश्यकता होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वह अपनी आँखों से उन्हें नहीं देख सकता हैं, इसके बजाय भगवान उन्हें दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं ताकि वह उनके योग और ऐश्वर्य को देख सकें। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि भगवान को देखने के लिए हमें सामान्य दृष्टि से अधिक उन्हें देखने की आवश्यकता होती है और इसके लिए हमें अपनी आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करना चाहिए। यह हमें योग और भक्ति की महत्वपूर्णता के बारे में शिक्षा देता है।