न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः। यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम॥6॥
Translation (HI)
वह मेरा परम धाम है जहाँ न सूर्य, न चन्द्रमा और न अग्नि प्रकाश करते हैं — जहाँ जाने के बाद कोई लौटकर नहीं आता।
Life Lesson (HI)
परम धाम आत्मा की अंतिम मंज़िल है — वहाँ से लौटना नहीं होता।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने अद्वितीय परम धाम के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनका परम धाम इस सांसारिक जगत से भिन्न है, जहाँ न सूर्य, न चंद्रमा और न अग्नि का प्रकाश होता है और कोई भी वहाँ से जाने के बाद वापस नहीं आता। इस स्थान को परम धाम कहा गया है।
इस भावार्थ से हमें यह सिखाई गई है कि भगवान का परम धाम अद्वितीय और अविनाशी है, जिसमें संसारिक संयोग और वियोग का कोई प्रभाव नहीं होता। इसके माध्यम से हमें यह बोध होता है कि आत्मा का अंतिम लक्ष्य भगवान के परम धाम की प्राप्ति होनी चाहिए जिससे एक बार पहुंचने पर वह वापस नहीं लौटती। यह स्थान अमर और अविनाशी है जो हमें संसारिक संदेशों से मुक्ति प्रदान करता है।