हे कौन्तेय! इन्द्रियों के विषय संपर्क से उत्पन्न शीत, उष्ण, सुख और दुःख क्षणिक हैं; इसलिए, हे भारत, उन्हें सहन करो।
Life Lesson (HI)
क्षणभंगुर परिस्थितियों में धैर्य ही सच्चा बल है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि इंद्रियों के संपर्क से उत्पन्न शीत, उष्ण, सुख और दुःख अनित्य होते हैं। यानी ये भावनाएं और अनुभव अस्थायी हैं और समय के साथ बदल जाते हैं। इसलिए हमें इन अनित्य भावनाओं को सहन करना चाहिए। धैर्य और सहनशीलता ही हमें इन परिस्थितियों का सामना करने में सहायक होती है। इस श्लोक से हमें यह सिखाने का संदेश मिलता है कि हमें शीत, उष्ण, सुख और दुःख की भावनाओं के प्रति साक्षात्कारी और सहनशील होना चाहिए, जो की हमें आत्मनिर्भर और स्थिर बनाता है।