मैं ही सूर्य से तपन करता हूँ, वर्षा करता हूँ और रोकता भी हूँ। हे अर्जुन! मैं ही अमृत और मृत्यु हूँ, सत् और असत् भी मैं ही हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर विरोधाभासों को भी समेटे हुए हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपनी महत्वता और सर्वशक्तिमान होने का बोध कराते हैं। वे कहते हैं कि वे ही सूर्य की तपन करते हैं, वर्षा करते हैं और संसार के संरक्षण एवं संहार का कार्य भी करते हैं। वे ही जीवों को अमृत के रूप में संजीवनी देते हैं और मृत्यु के रूप में भी उन्हीं के हाथों होती है। सत्य और असत्य का भी जीवन सृष्टि करने वाले ईश्वर ही हैं।
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि भगवान सम्पूर्ण जगत के सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी और सबका पालन-पोषण करने वाले हैं। उनका सच्चा स्वरूप अत्यन्त विस्तारशील और अद्वितीय है। उनकी इस महिमा को समझकर हमें विश्वास और श्रद्धा में वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह श्लोक हमें यह भी बताता है कि ईश्वर किसी भी परिस्थिति में हमारे साथ हैं और हमें संजीवनी देने वाले हैं।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि हमें ईश्वर में निरंतर विश्वास और श्रद्धा रखनी चाहिए। हमें उनकी अनन