Bhagavad Gita • Chapter 1 • Verse 10

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Chapter 1 • Verse 10

Arjuna Vishada Yoga

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्। पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्॥10॥
Translation (HI)
हमारी सेना, भीष्म द्वारा रक्षित होने पर भी, अपर्याप्त प्रतीत होती है; जबकि उनकी सेना, भीम द्वारा रक्षित, पर्याप्त है।
Life Lesson (HI)
मनोबल और आत्मविश्वास, मात्र संख्या से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता में युद्ध के समय की रणनीति और युद्ध सम्बंधित महत्वपूर्ण उपदेश दिया गया है। यहाँ भगवान कृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि सेना की महत्वा संख्या से नहीं, बल और सामर्थ्य से निर्भर होती है। भीष्म पितामह द्वारा संरक्षित सेना अपर्याप्त होती है क्योंकि उसका बल और सामर्थ्य अनुकूल नहीं है, जबकि भीम द्वारा रक्षित सेना पर्याप्त है क्योंकि उसका बल व सामर्थ्य सुचारु रूप से संरक्षित है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जा रही है कि हमें समर्थन और बल की अवश्यकता होती है जो किसी भी कार्य को सफलता की दिशा में ले जा सकती है। यहाँ बताया गया है कि आत्मविश्वास और मनोबल मानव जीवन में महत्वपूर्ण होते हैं और इनका महत्व अधिक संख्या से अधिक होता है। यह शिक्षा हमें यह बताती है कि हमें अपनी शक्तियों पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और सबल होने के साथ-साथ सही दिशा और योजना के साथ चलना चाहिए।