अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः। नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः॥9॥
Translation (HI)
और भी बहुत से वीर हैं जिन्होंने मेरे लिए अपने प्राणों को त्यागने का संकल्प लिया है। वे विविध शस्त्रों के ज्ञाता और युद्ध में निपुण हैं।
Life Lesson (HI)
समर्पण और युद्ध कौशल, एक सशक्त सेना की पहचान होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे जो अन्य शूरवीर हैं, वे सब मेरे लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प किया हैं। वे सभी युद्ध के कुशल और विभिन्न शस्त्रों के ज्ञाता हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि समर्पण और युद्ध कौशल, एक सशक्त सेना की पहचान होते हैं। यह श्लोक हमें यह बताता है कि युद्ध में सफलता प्राप्त करने के लिए समर्पण और युद्ध कौशल की आवश्यकता होती है। वास्तव में, एक सशक्त सेना उसे निर्मित करने वाले सभी वीरों की शक्ति, साहस और समर्पण से ही सफल होती है।
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समर्पण और युद्ध कौशल के महत्व के बारे में शिक्षा देते हैं, जिससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि एक सशक्त सेना कैसे निर्मित की जाती है और विजय प्राप्त की जा सकती है।