अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः। नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥
Translation (HI)
कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने 'अनन्तविजय', नकुल और सहदेव ने 'सुघोष' और 'मणिपुष्पक' शंख बजाए।
Life Lesson (HI)
विविध नामों के पीछे विश्वास और संकल्प की शक्ति छिपी होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में महाभारत युद्ध के पहले दिन का वर्णन है, जब पांडवों ने अपने सेनापति युधिष्ठिर के नेतृत्व में युद्ध की शुरुआत की। यहाँ दिखाया गया है कि युद्ध की शुरुआत समय पांडवों ने अपने विभिन्न शंखों का ध्वनि करके की।
इस श्लोक में उल्लेखित नाम "अनन्तविजय", "सुघोष" और "मणिपुष्पक" शंख का महत्व यह है कि यह नाम पांडवों की विशेष संकल्प और विश्वास को प्रकट करते हैं। यह नाम उनकी असीम विजय, शक्ति, और निष्ठा को प्रकट करते हैं। ये नाम उनकी आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं और उन्हें युद्ध में सफलता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि अगर हमारे विश्वास और संकल्प मजबूत हैं, तो हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, यह भी दिखाता है कि अगर हम अपने मार्ग पर स्थिर रहें और सहयोगी साथीयों के साथ मिलकर कार्य करें, तो हमारे लक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। इसके अलावा,