काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः। धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥
Translation (HI)
अत्युत्तम धनुर्धारी काशिराज, महारथी शिखंडी, धृष्टद्युम्न, विराट और अपराजित सात्यकि भी शंख बजाने वालों में थे।
Life Lesson (HI)
सभी योद्धा अपने सामर्थ्य के अनुसार धर्मयुद्ध में योगदान देते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के महाभारत युद्ध के विभीषण योद्धाओं का वर्णन किया गया है। काशिराज, शिखंडी, धृष्टद्युम्न, विराट और सात्यकि इनमें से कुछ उल्लेखनीय योद्धा थे जो युद्ध के मैदान में अपने असाधारण साहस और योग्यता का प्रदर्शन करते थे।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि हर व्यक्ति को अपने सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। युद्ध का मैदान यहाँ धर्मयुद्ध के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें योद्धाओं को अपने धर्म और न्याय के लिए लड़ना चाहिए। यहाँ योद्धाओं के योगदान के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि हर कोई अपने क्षेत्र में अपने योग्यता और प्रासंगिकता के अनुसार समर्थन देने के लिए तैयार होना चाहिए।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह सिखाने का संदेश मिलता है कि हमें अपनी क्षमताओं का सदुपयोग करते हुए अपने कर्तव्य निभाना चाहिए और समर्थन करना चाहिए।