श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि। तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्॥27॥
Translation (HI)
ससुराल पक्ष और मित्रों को दोनों सेनाओं में खड़ा देखकर अर्जुन ने उन्हें अपने संबंधियों की तरह देखा।
Life Lesson (HI)
जब अपने ही दोनों ओर खड़े हों, तब निर्णय कठिन हो जाता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता में अर्जुन के सांगठनिक द्वंद्व की अवस्था का वर्णन है। यहाँ उस समय का वर्णन किया गया है जब अर्जुन युद्धभूमि पर अपने साहसी और प्रियजनों को खड़े हुए देखता है। उसके श्वशुर (ससुराल) और सुहृद (मित्र) दोनों सेनाओं को देखकर उसे उन्हें अपने संबंधियों की तरह समझा गया है।
इस श्लोक का संदेश है कि जब हमारे सामने हमारे प्रियजनों और दुश्मनों के साथ खड़ा होने की स्थिति आती है, तो हमें निर्णय लेना कठिन हो सकता है। इस समय हमें अपने धर्म और जिम्मेदारियों के साथ सही कार्रवाई करनी चाहिए, और यहाँ भगवान कृष्ण अर्जुन को सही मार्ग दिखाने के लिए तैयार हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि जीवन में उठने वाले विभिन्न परिस्थितियों में हमें सही और उचित निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। इसके लिए हमें अपने धर्म और जिम्मेदारियों के प्रति सचेत और समर्पित रहना चाहिए।