कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत्। दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्॥28॥
Translation (HI)
स्वजनों को युद्ध के लिए उपस्थित देखकर अर्जुन करुणा से व्याप्त होकर शोक करने लगे और बोले।
Life Lesson (HI)
दया और मोह के बीच का अंतर समझना आवश्यक है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के अध्याय 1 की घटना का वर्णन है, जिसमें अर्जुन अपने स्वजनों और गुरुओं को युद्ध के लिए तैयार होते हुए देखकर दुःखी हो जाते हैं। उन्हें देखकर उन्हें अपने पुत्र, पिता, भाई आदि को युद्ध में हत्या करने का भय लगता है और वे शोकमग्न हो जाते हैं।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह सिखाया जाता है कि कभी-कभी हमारी भावनाएं हमारे निर्णयों को असहाय बना सकती हैं। अर्जुन की इस स्थिति से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में सही और गलत के बीच का अंतर समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उसके मोह से मुक्ति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें स्वयं को अपने भावनाओं से परे करके सही निर्णय लेना चाहिए। इससे हम अपने कर्तव्य का पालन करते हुए भी अपनी भावनाओं को संतुलित रख सकते हैं।