सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति। वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते॥29॥
Translation (HI)
मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं, मुख सूख रहा है, शरीर कांप रहा है और रोमांच हो रहा है।
Life Lesson (HI)
शारीरिक लक्षण हमारे मनोभावों का दर्पण होते हैं।
Commentary (HI)
श्लोक 29 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि उनके शरीर में विभिन्न शारीरिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं। उनके अंग शिथिल हो रहे हैं, मुख सूख रहा है, शरीर कांप रहा है और उनकी रोमांचित हो रही है। यह शारीरिक लक्षण उनके भावनात्मक स्थिति का प्रतिबिम्ब हैं।
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे शारीरिक लक्षण हमारे मन की स्थिति को प्रकट करते हैं। जब हम चिंतित या उदास होते हैं, तो हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में शिथिलता, सूखापन, और कम्पन का अनुभव होता है। इसलिए, हमें अपने भावनात्मक स्थिति को सुधारने के लिए चिंता और उदासीनता को दूर करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक के माध्यम से हमें यह बताते हैं कि हमें अपने मानसिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और उसे सुधारने के लिए उचित कर्म करना चाहिए।