Bhagavad Gita • Chapter 1 • Verse 40

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Chapter 1 • Verse 40

Arjuna Vishada Yoga

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः। धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत॥40॥
Translation (HI)
कुल के नाश से सनातन धर्म भी नष्ट हो जाते हैं, और जब धर्म नष्ट होता है, तो अधर्म हावी हो जाता है।
Life Lesson (HI)
धर्म की रक्षा में ही समाज और संस्कृति की रक्षा संभव है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण धर्म और कुल के महत्व को समझाते हैं। वे कहते हैं कि जब किसी कुल के नाश होता है तो साथ ही उस कुल का सनातन धर्म भी नष्ट हो जाता है। और जब धर्म नष्ट हो जाता है, तो अधर्म व्याप्त हो जाता है और समाज में असुरक्षा और अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न होती है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि धर्म की पालना करना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धर्म ही हमें सही मार्ग दिखाता है, सही और गलत की पहचान कराता है और समाज में सामंजस्य और सुव्यवस्था बनाए रखने में सहायक होता है। इसलिए, हमें अपने कुल और समाज के धर्म की रक्षा करनी चाहिए ताकि समृद्धि, समानता और शांति की स्थिति बनाए रख सकें।