Bhagavad Gita • Chapter 1 • Verse 39

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Chapter 1 • Verse 39

Arjuna Vishada Yoga

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन॥39॥
Translation (HI)
हे जनार्दन! जो कुलविनाश के दोष को भलीभांति जानते हैं, हमें उस पाप से क्यों न बचना चाहिए?
Life Lesson (HI)
ज्ञान तभी सार्थक है जब वह हमारे कर्मों को नियंत्रित करे।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण कह रहे हैं कि हे जनार्दन! जो लोग कुल का विनाश करने वाले दोष को अच्छे से समझते हैं, उन्हें उस पाप से क्यों बचना नहीं चाहिए? यहाँ 'कुल' का अर्थ वंश और परिवार है। अर्थात् जो लोग परिवार के आधार पर भावनात्मक और सामाजिक उत्थान को नष्ट करने वाले कार्य करते हैं, उन्हें उस पाप से बचना चाहिए। यहाँ भगवान कृष्ण हमें यह सिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि हमें समाज और परिवार के हित में कर्म करना चाहिए और अच्छे गुणों को बढ़ावा देना चाहिए। उस पाप या दोष से बचना चाहिए जो हमारे समाज और परिवार के अधिकारों को हानि पहुंचाता है। इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि हमें समाजिक और परिवारिक उत्थान के लिए सकारात्मक कर्म करने चाहिए और नकारात्मक कर्मों से बचना चाहिए।