वर्णसंकर कुलों को नरक की ओर ले जाता है और पूर्वजों को पिंड और जल की क्रिया से वंचित कर देता है।
Life Lesson (HI)
धार्मिक कर्तव्यों की उपेक्षा पीढ़ियों का पतन कर सकती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण बता रहे हैं कि वर्णसंकर कुल के लिए नरक की ओर ले जाता है और कुलघाती व्यक्तियों के पूर्वजों की श्राद्ध क्रियाएं भी नष्ट कर देता है।
इस श्लोक का मुख्य संदेश यह है कि जब हम अपने कर्तव्यों का उपेक्षा करते हैं और अपने कुल और परिवार के लिए सही कार्य नहीं करते हैं, तो हमारे परिवार का पतन हो सकता है। वर्णसंकर यानी विविध जातियों के अनुपातिक मिश्रण का उत्पत्ति होना, कुल के संगठन में उथल-पुथल करने का कारण बन सकता है और इससे समाज में अव्यवस्था उत्पन्न हो सकती है।
इस श्लोक से हमें यह सिखाने की कोशिश की जा रही है कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और सही दिशा में चलना चाहिए ताकि हमारे परिवार और समाज में समर्थन और समानता बनी रहे।