श्रीभगवान ने कहा: हे कुरुश्रेष्ठ! अब मैं तुम्हें अपनी दिव्य विभूतियाँ बताऊँगा, मुख्य रूप से। क्योंकि मेरी विस्तार का कोई अंत नहीं है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर की महिमा असीम है — हम केवल उसका अंश ही जान सकते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे अब उसकी दिव्य विभूतियों का वर्णन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह विभूतियाँ अत्यंत दिव्य और आत्मिक हैं। उन्होंने भी बताया कि उनकी विभूतियों का विस्तार अनंत है, उसका कोई अंत नहीं है।
इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि भगवान की महिमा अत्यंत विस्तारशील है और हम उसकी केवल एक अल्प भाग को जान सकते हैं। भगवान की दिव्य विभूतियाँ हमें उसके असीम शक्ति और महानता का अनुभव कराती हैं, जिससे हमें उसके प्रति भक्ति और आदर बढ़ाने में सहायता मिलती है।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह भी सिखाने को मिलता है कि ईश्वर की महिमा को समझने के लिए हमें अपनी भक्ति और श्रद्धा को मजबूत करनी चाहिए और हमें उसके असीम गुणों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।