अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः। अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च॥20॥
Translation (HI)
हे गुडाकेश! मैं समस्त जीवों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ। मैं ही भूतों का आदि, मध्य और अंत हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर ही जीवन की सम्पूर्ण यात्रा में साथ रहते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वह सभी भूतों के हृदय में स्थित आत्मा हैं। वे सभी जीवों का आदि, मध्य और अंत हैं। यह श्लोक उस सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान परमात्मा का वर्णन करता है जो हर एक के अंतर्यामी हैं और सभी कार्यों के कारण हैं।
इस भावार्थ के माध्यम से हमें यह ज्ञान मिलता है कि हमारा आत्मा अनन्त और अविनाशी है जो सभी जीवों में समाहित है। यह हमें यह बताता है कि ईश्वर हमेशा हमारे साथ हैं और हमें सम्पूर्ण यात्रा में निरंतर गाइड करते हैं। इस श्लोक से हमें यह भी सीखने को मिलता है कि सभी जीवों में एक ही आत्मा निवास करती है और हमें सभी के प्रति सम्मान और भाईचारा बनाए रखना चाहिए।