मैं आदित्यों में विष्णु हूँ, ज्योतियों में तेजस्वी सूर्य, मरुतों में मरीचि और नक्षत्रों में चंद्रमा हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर प्रत्येक भव्यता और तेजस्विता में प्रकट होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपनी महिमा और विश्वरूप को व्यक्त करते हुए कह रहे हैं कि वे सब प्रकार के प्रकाशों और ऊर्जाओं में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि वे सूर्य के रूप में आदित्यों में विष्णु, तेजस्वी रवि के रूप में ज्योतियों में, मरुतों के रूप में मरीचि, और नक्षत्रों के रूप में चंद्रमा हैं।
यह श्लोक हमें यह बताता है कि भगवान की महिमा और शक्ति समस्त प्राणियों के भीतर व्याप्त है। जैसे सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है, उसी प्रकार भगवान के बिना हमारा जीवन भी संभव नहीं है। उनकी उपस्थिति हमारे जीवन को प्रकाशित करती है और हमें उनके शक्ति और सामर्थ्य की अनुभूति कराती है।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ईश्वर हर जीवन की ऊर्जा और प्रकाश हैं, और हमें उनकी उपासना, भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से उनके साथ जुड़कर उनसे अनुग्रह और मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। भगवान की महिमा को समझने से हमें आत्मज्ञान, शांति और सफलता की प्राप