वेदों में मैं सामवेद हूँ, देवों में इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मन हूँ और समस्त प्राणियों में चेतना हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर का प्रभाव हर अस्तित्व में गहराई तक है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने विभूतियों के माध्यम से अपनी महानता और अद्वितीयता का वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वेदों में सामवेद, देवों में इन्द्र, इन्द्रियों में मन और सभी प्राणियों में चेतना उन्हीं का स्वरूप है। यह सब संसार में उनका प्रतिष्ठान है।
इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि भगवान सभी जीवों के अंतर्यामी हैं और सभी चीजों में उनका प्रभाव है। यह हमें यह शिक्षा देता है कि हमें सभी जीवों में भगवान की पहचान करनी चाहिए और सभी में उनके साथ एकता और समर्पण के भाव से रहना चाहिए। इससे हमें अहंकार और भेदभाव की भावना से मुक्ति मिलती है और हम सभी को एक ही परमात्मा में एकीभाव से देखने की क्षमता प्राप्त होती है।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह ज्ञान मिलता है कि समस्त सृष्टि में एकता और एकत्व की अद्वितीयता है और हमें सभी को सम्मान और प्रेम से देखना चाहिए। इससे हमारा जीवन सहजता, समर्पण और उदारता से भर जाता है और हम सभी के बीच भ