महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः॥6॥
Translation (HI)
पूर्वकाल में सात महर्षि और चार मनु मेरी मनः संकल्प शक्ति से उत्पन्न हुए — उन्हीं से ये लोक की संतानें उत्पन्न हुईं।
Life Lesson (HI)
ईश्वर ही सृष्टि के आदि कारण हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भगवद गीता में संस्कृति और धर्म के मौलिक सिद्धांतों पर चर्चा कर रहे हैं। यहाँ प्रकट होता है कि पूर्वकाल में सात महर्षि और चार मनु, अर्थात मनुष्य के आदि पिता, ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार ईश्वरीय मनःसंकल्प शक्ति से उत्पन्न हुए थे। उनके माध्यम से ही इस दुनिया में विभिन्न प्रकार की संतानें उत्पन्न हुईं।
यह श्लोक हमें यह शिक्षा देता है कि हम सभी ईश्वर के आदि कारण हैं और हमें ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार जीना चाहिए। हमें अपने कर्मों को सही दिशा में ले जाने के लिए ईश्वरीय भावना और मनःसंकल्प की शक्ति का सहारा लेना चाहिए। इस श्लोक से हमें यह भी समझने को मिलता है कि हमें अपने संतानों को भी सही मार्ग पर चलाना चाहिए ताकि वे उच्च आदर्शों के साथ जीवन जी सकें।
इस रूप में, यह श्लोक हमें ईश्वर के महत्वपूर्ण स्थान की समझ और ईश्वरीय भावना की महत्वता को समझाता है। यह हमें समझने के लिए प्रेरित करता है कि हमें ईश्वर के उ