उस रूप में अनेकों मुख और नेत्र, अनेकों अद्भुत दृश्य, अनेकों दिव्य आभूषण, और अनेकों दिव्य उठाए हुए आयुध थे।
Life Lesson (HI)
ईश्वर का विराट स्वरूप हमारी कल्पना से परे भव्य होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने विराट स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं। उनका यह रूप अत्यंत भव्य और अद्वितीय है। उनके अनेक मुख और नेत्र दिखाई देते हैं, जो हमारी सामान्य धारणाओं से परे हैं। उनकी दिव्य आभूषणों और दिव्य उठाए हुए आयुधों की चमक भी अद्वितीय है।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि ईश्वर का साकार रूप हमारी समझ से परे है, और उसका विराट स्वरूप हमारी सृष्टि के सामान्य सीमाओं से बहुत ऊंचा और अद्वितीय है। इसका अर्थ है कि भगवान की महानता और उसकी शक्ति हमारी समझ से परे है, और हमें उसकी अद्वितीयता को स्वीकार करना चाहिए। इससे हमें ईश्वर की महानता और उसकी असीम शक्ति का आदर करने की शिक्षा मिलती है।