उस समय पाण्डवों में अर्जुन ने देवों के देव श्रीकृष्ण के शरीर में सम्पूर्ण जगत को एक साथ विभाजित रूप में देखा।
Life Lesson (HI)
ईश्वर में संपूर्ण सृष्टि समाहित है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के अध्याय 11 में दिखाए गए विराट रूप का वर्णन है। यहाँ अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के रूप में संसार की सम्पूर्णता को देखा। उन्होंने देवों के देव भगवान कृष्ण के शरीर में सम्पूर्ण जगत को एक साथ विभाजित रूप में देखा।
यह श्लोक हमें यह बताता है कि भगवान में सम्पूर्ण सृष्टि समाहित है। ईश्वर ही सबका कारण और संरक्षक है, और सब कुछ उसी में व्याप्त है। इसका अर्थ है कि हमें सब कुछ में भगवान का साक्षात्कार करना चाहिए और सभी प्राणियों में भगवान की ही उपस्थिति को महसूस करना चाहिए।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि हमें संसार में भगवान की साक्षात्कार करना चाहिए और समस्त जीवों में उसकी उपस्थिति को देखना चाहिए। इससे हमें समस्तता और एकता की भावना समझाई जाती है और हमें समस्त जीवों के प्रति सम्मान और सहानुभूति का भाव धारण करने की प्रेरणा मिलती है।