अर्जुन ने कहा: हे देवों के देव! मैं आपके शरीर में सभी देवताओं को, विभिन्न जीवों के समुदायों को, ब्रह्मा को कमलासन पर बैठे हुए, और सभी ऋषियों तथा दिव्य नागों को देख रहा हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर के रूप में सभी दिव्यता और सत्ता समाहित होती हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से कह रहे हैं कि उन्होंने अपने दिव्य रूप में भगवान के विविध स्वरूपों को देखा है। उन्होंने गोद श्रीकृष्ण में सभी देवताओं को, भूतों के समुदायों को, ब्रह्मा को जो कमल पर बैठे हुए हैं, सभी ऋषियों को और दिव्य नागों को देखा है।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि भगवान का रूप अत्यंत विस्तृत और अद्भुत है और उसमें समस्त सत्ता और शक्ति समाहित है। इसके माध्यम से हमें यह भी याद दिलाया जाता है कि हमें भगवान के अद्वितीय रूप की श्रद्धा रखनी चाहिए और उसकी उपासना में लगनी चाहिए।