मैं आपको किरीटधारी, गदा और चक्रधारी, चारों ओर से प्रकाशमान, अग्नि और सूर्य के समान दीप्तिमान, और अप्रमेय रूप में देख रहा हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर का तेज मनुष्य की दृष्टि की सीमा से परे होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान अर्जुन को अपने विराट स्वरूप की दिव्य दर्शन दे रहे हैं। वे किरीट (मुकुट) धारी, गदा (मार्गदर्शक दंड), और चक्र (चक्रव्यूह के समर्थन के लिए) धारण करने वाले हैं। उनकी दिव्य प्रकाशमय और अप्रमेय ज्योति को देखकर अर्जुन को आश्चर्य हो रहा है। उनका तेज अग्नि और सूर्य के समान प्रकाशमान है, और उसे देखना असाध्य लग रहा है।
इस श्लोक का मूल अर्थ है कि भगवान का विश्वरूप हमारी समझ से परे है, हमारे इन्द्रियों से दृश्य नहीं होता। यह श्लोक हमें ईश्वर की अद्वितीयता और अमूर्त स्वरूप का ज्ञान देता है। हमें यह बताता है कि ईश्वर की महिमा और शक्ति हमारी समझ से अत्यंत ऊंची है, और हमें उसके प्रति भक्ति और आदर्श भावना रखनी चाहिए।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ईश्वर की अद्वितीयता और शक्ति को हमारी समझ से परे मानकर हमें उसके प्रति भक्ति और विश्वास बनाए रखना चाहिए। भगवान का विश्वरूप हमें उसकी महिमा और अमूर्त स्वर