श्रीभगवान ने कहा: हे पार्थ! अब मेरे सैंकड़ों और हजारों दिव्य रूपों को देखो, जिनका वर्ण और आकृति अनेक प्रकार के हैं।
Life Lesson (HI)
ईश्वर की विभूतियाँ असंख्य हैं — हर रूप में दिव्यता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वह अब उनके अनेक दिव्य रूपों को देखें, जो संसार में अद्वितीय हैं। इन रूपों में विविध वर्ण और आकृतियाँ हैं। भगवान की इन विभूतियों का दर्शन करके अर्जुन को यह शिक्षा मिलती है कि संसार में ईश्वर की असीम विभूतियाँ हैं और हर एक रूप में दिव्यता छिपी है। यह उसे यह समझाने के लिए कहा गया है कि जीवन में ईश्वर की अद्वितीयता और महत्व को समझें और उसके परमात्मिक स्वरूप का अनुभव करें।