मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो। योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम्॥4॥
Translation (HI)
हे योगेश्वर! यदि आप मुझे अपने अविनाशी रूप को दिखा सकते हैं, तो कृपया वह रूप मुझे दिखाइए।
Life Lesson (HI)
दिव्य अनुभव की प्राप्ति विनम्रता और पात्रता से ही होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि अगर वह उनके दिव्य स्वरूप को देखने के योग्य समझते हैं तो वह उसे दिखा दें। भगवान कृष्ण इस अव्यय स्वरूप को देखने का अवसर देने के लिए अर्जुन की प्रार्थना को सुनते हुए उनके सामने उस विशाल और विस्तृत रूप को प्रकट करते हैं।
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि दिव्य अनुभव को प्राप्त करने के लिए हमें भगवान के सामने विनम्र और प्रसन्न मन से रहना चाहिए। जब हम अपने आप को उसके आद्यात्मिक शक्तियों में समर्पित करते हैं, तो हमें दिव्य अनुभव की प्राप्ति होती है और हम भगवान के साक्षात्कार को अनुभव कर सकते हैं।