वह (ब्रह्म) सब ओर हाथ-पाँव, आँख, सिर, मुख और कान वाला है — वह समस्त जगत को व्याप्त करके स्थित है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर सर्वत्र है — सबमें, सबके रूप में।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान की सर्वव्यापितता और समग्रता का वर्णन किया गया है। यहां कहा गया है कि भगवान जिस तरह से हमारे हाथ, पैर, आँख, सिर और कान सभी अंगों में होते हैं, उसी प्रकार वे समस्त जगत को व्याप्त करके स्थित हैं। इसका अर्थ है कि भगवान सभी प्राणियों, सभी वस्तुओं और सभी स्थितियों में निवास करते हैं। वे सभी जगत को अपने आप में समाहित किए हुए हैं।
यह श्लोक हमें यह शिक्षा देता है कि ईश्वर हमारे आसपास हर व्यक्ति, हर वस्तु और हर स्थिति में हैं। हमें अपने आसपास के सभी क्षणों में ईश्वर की समानता देखनी चाहिए और सभी में भगवान का आदर करना चाहिए। इस श्लोक से हमें यह भी सिखाया जाता है कि हमें सभी प्राणियों और सभी वस्तुओं के प्रति सम्मान और सहानुभूति रखनी चाहिए, क्योंकि भगवान हर जगह मौजूद हैं।