अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम्। भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च॥17॥
Translation (HI)
वह प्राणियों में अविभाज्य होते हुए भी विभक्त प्रतीत होता है। वह जानने योग्य है, सबका पालनकर्ता है, और सबको उत्पन्न एवं नष्ट करने वाला भी है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर सृष्टि के प्रत्येक रूप में एक ही रहता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान का विभिन्न प्राणियों के प्रति सामान्य स्वरुप से अविभाज्य होने का वर्णन है, लेकिन उनकी प्रकृति और शक्तियों के अनुसार वे विभक्त प्रतीत होते हैं। वे सभी जीवों का पालन-पोषण करने वाले हैं, जो सृष्टि का रक्षक और संहारक भी हैं। इसका मतलब है कि ईश्वर सभी जीवों में एक ही रहता है और सभी को समान रूप से पालन करता है, चाहे वे जीव किसी भी रूप में हों। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि हम सभी जीवों में ईश्वर की सामान्यता और एकता को समझना चाहिए और सभी को सम्मान देना चाहिए।