हे भारत! कभी रज और तम को दबाकर सत्त्व प्रबल होता है, और कभी सत्त्व तथा तम को दबाकर रज; कभी रज और सत्त्व को दबाकर तम प्रबल होता है।
Life Lesson (HI)
गुणों की सत्ता चंचल है — आत्मा को उनसे परे जाना है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भगवद गीता में गुणों की महत्ता को बता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि रजोगुण और तमोगुण को दबाकर सत्त्वगुण प्रबल हो जाता है, और कभी-कभी सत्त्वगुण और तमोगुण को दबाकर रजोगुण; और कभी-कभी रजोगुण और सत्त्वगुण को दबाकर तमोगुण प्रबल हो जाता है।
इस श्लोक का महत्त्व यह है कि गुणों की सत्ता हमारे व्यक्तित्व और व्यवहार पर प्रभाव डालती है। रजोगुण का प्रकार उत्साह, विक्षिप्तता और अशांति है, तमोगुण का प्रकार अलसता, अज्ञान और भ्रम है, और सत्त्वगुण का प्रकार शांति, ज्ञान और समर्पण है। इसलिए, यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि हमें गुणों के प्रभाव से परे जानकर आत्मा की उच्चता को पहचानना चाहिए और अपने जीवन में सत्त्वगुण को बढ़ावा देना चाहिए। यह आत्मा की उच्चता और आत्म-साक्षात्कार की ओर हमारी प्रेरणा के रूप में काम कर सकता है।