जब शरीरधारी सत्त्वगुण की प्रधानता में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब वह श्रेष्ठ और निर्मल लोकों को प्राप्त होता है।
Life Lesson (HI)
सत्त्व में मृत्यु व्यक्ति को श्रेष्ठ लोकों की ओर ले जाती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण जी कह रहे हैं कि जब किसी व्यक्ति के अन्दर सत्त्वगुण की प्रधानता होती है और उसके शरीर में उस गुण का विशेष प्रकार का प्रभाव होता है, तो उसका शरीर नष्ट हो जाता है और वह श्रेष्ठ और पवित्र लोकों को प्राप्त होता है।
इस भावार्थ में, यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि जब हमारे अंदर सत्त्वगुण की प्रधानता होती है, तो हमारा मानसिक स्थिति उच्च होती है और हम ऊँचाईयों की ओर पहुंचते हैं। यह हमें यह बताता है कि अपने जीवन में सत्त्वगुण को बढ़ावा देना और अध्यात्मिक विकास को प्राथमिकता देना हमें श्रेष्ठ और पवित्र लोकों की ओर ले जाता है।
इस श्लोक का महत्वपूर्ण संदेश है कि हमें सत्त्वगुण को विकसित करने के लिए अपने जीवन में सात्त्विकता को बढ़ावा देना चाहिए और अपने मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।