Bhagavad Gita • Chapter 14 • Verse 15

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Chapter 14 • Verse 15

Gunatraya Vibhaga Yoga

रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते। तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते॥15॥
Translation (HI)
रजोगुण में मृत्यु होने पर कर्म में आसक्त जन्म मिलता है, और तमोगुण में मृत्यु पर अज्ञानता से भरी योनियों में जन्म होता है।
Life Lesson (HI)
मृत्यु के समय का गुण अगला जन्म निर्धारित करता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता में मनुष्य के जीवन में गुणों का महत्व व्यक्त किया गया है। इसमें तीन प्रमुख गुण - सत्त्व, रजस और तमस का उल्लेख है। गुणों के प्रभाव से मनुष्य के जन्म और उसकी प्राप्ति के तरीके का वर्णन किया गया है। रजोगुण में मृत्यु होने पर कर्म में आसक्त जन्म मिलता है, और तमोगुण में मृत्यु पर अज्ञानता से भरी योनियों में जन्म होता है। यहाँ 'रजसि' गुण में मृत्यु के समय को विशेष रूप से उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस गुण में विविध प्रकार के कर्मों में आसक्ति होती है, जो अगले जन्म को निर्धारित करती है। इसके विपरीत, 'तमसि' गुण में मृत्यु के समय पूर्ण अज्ञानता और मूढ़ता से भरी योनियों में जन्म होता है। इस गुण में मानसिक अंधकार और अज्ञानता होती है, जो जीव को भ्रम में डालकर उसे अधोगति की दिशा में ले जाती है। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे कर्मों और गुणों का महत्व हमारे जन्म और भविष्य के लिए कितना मह