हे भारत! मेरी प्रकृति (महद्ब्रह्म) मेरी योनि है; उसमें मैं गर्भ स्थापित करता हूँ और उससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर ही समस्त सृष्टि के मूल कारण हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भगवद गीता में महत्वपूर्ण सिद्धांत का विवरण कर रहे हैं। यहाँ उन्होंने अपनी योनि के रूप में महद्ब्रह्म को बताया है, जिसमें सभी प्राणी की उत्पत्ति होती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि सम्पूर्ण सृष्टि का मूल कारण भगवान ही हैं। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को सृष्टि के नियमों और उसके पीछे छुपे ईश्वरीय शक्ति के महत्व को समझाने की सलाह दी है।
भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक में सृष्टि के प्रारंभिक और सार्वभौमिक कारण के रूप में अपनी सर्वशक्तिमान स्वरूप का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि संसार में सभी प्राणियों की उत्पत्ति भगवान के द्वारा ही होती है, जो सबका पालन-पोषण करते हैं और सृष्टि के सम्पूर्ण व्यवस्था का नियंत्रण रखते हैं।
इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि ईश्वर ही संसार के सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माता और पालन-पोषण करने वाला है। हमें ईश्वर के सामर्थ्य और उसकी अद्वितीय शक्त