गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा। पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः॥13॥
Translation (HI)
मैं पृथ्वी में प्रविष्ट होकर अपनी शक्ति से प्राणियों को धारण करता हूँ, और चंद्रमा बनकर सभी वनस्पतियों का रस मैं ही प्रदान करता हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर हर रूप में प्राणियों को जीवन और पोषण देता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण भगवान कह रहे हैं कि वे सभी प्राणियों की उत्पत्ति, संरक्षण और उनकी पोषण संभालने में संलग्न हैं। उन्होंने अपनी ओजस्वी शक्ति से पृथ्वी में प्रविष्ट होकर सभी जीवों को संभाला है। वे सभी वनस्पतियों की ऊर्जा भी हैं और उन्हें उनके रस से प्रदान करते हैं।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि ईश्वर सभी प्राणियों को पोषण और जीवनदायक ऊर्जा प्रदान करता है। वे सभी जीवों की देखभाल करने वाले हैं और सभी प्राणियों का हित करने के लिए समर्पित हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें सभी जीवों के प्रति समर्पित भावना और दया रखनी चाहिए, क्योंकि ईश्वर सभी की देखभाल करते हैं और हमें भी उनकी एकता और समर्पण के साथ जीना चाहिए।