मैं ही प्राणियों के शरीर में वैश्वानर अग्नि बनकर, प्राण और अपान वायु से युक्त होकर चार प्रकार के अन्न को पचाता हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर जीवन की सूक्ष्मतम क्रियाओं में भी कार्य करता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अपने रूप के माध्यम से बता रहे हैं कि वे ही वैश्वानर अग्नि रूप में प्राणियों के शरीर में स्थित होकर उनकी जीवनशक्ति का संरक्षण करते हैं। वे प्राण और अपान वायु से संयुक्त होकर चार प्रकार के अन्नों को पचाते हैं, जिससे प्राणियों का जीवन चालित रहता है।
इस श्लोक से हमे यह सीख मिलती है कि ईश्वर हर व्यक्ति के अंदर अनुपस्थित है और सभी क्रियाएँ उन्हीं के आदेशानुसार होती हैं। यह श्लोक हमें यह बताता है कि ईश्वर जीवन के सभी पहलुओं में सक्रिय हैं और हमें सभी कार्यों को भगवान की उपस्थिति में करना चाहिए। इससे हम जीवन के हर क्षेत्र में भगवान की प्रत्यक्षता महसूस कर सकते हैं और उसकी उपस्थिति में सच्चे भावनात्मकता एवं समर्पण विकसित कर सकते हैं।