मैं सभी के हृदय में स्थित हूँ — मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और विस्मृति होती है। समस्त वेदों से मैं ही जाना जाता हूँ; मैं ही वेदांत का कर्ता और वेदों का ज्ञाता हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर अंतःकरण में ज्ञान का स्रोत है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कहते हैं कि वे सभी प्राणियों के हृदय में स्थित हैं। इसका अर्थ है कि ईश्वर सम्पूर्ण जीवों के अंतर्मन में विराजमान हैं। उनसे ही हमें स्मृति, ज्ञान और भुलाने की क्षमता प्राप्त होती है। वे सम्पूर्ण वेदों के ज्ञान के स्रोत हैं, और वेदों का ज्ञाता होने के साथ ही वे वेदांत का कर्ता भी हैं। इस भावात्मक श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर केवल बाह्य दर्शन से नहीं, बल्कि अंतरंग दृष्टि से भी अत्यंत साक्षात्कार करने योग्य हैं। ज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ईश्वर के साथ अंतरंग संवाद में रहकर ही है।