इस संसार में दो प्रकार के पुरुष हैं — क्षर (नाशवान) और अक्षर (अविनाशी)। सभी प्राणी क्षर हैं, और आत्मा अक्षर कही जाती है।
Life Lesson (HI)
व्यक्तित्व के दो पहलू — शरीर नश्वर, आत्मा शाश्वत।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को संसार में दो प्रकार के पुरुषों के बारे में बताते हैं। एक है क्षर, जिसे नश्वर या अनादि कहा जाता है और दूसरा है अक्षर, जिसे अविनाशी या शाश्वत कहा जाता है। क्षर पुरुष सभी भूतों में पाया जाता है, जबकि अक्षर पुरुष अद्वितीय और शाश्वत है।
यह श्लोक हमें व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में सिखाता है। हमारा शरीर नश्वर है, यानी यह जन्म लेता है और मरता है, जबकि हमारी आत्मा शाश्वत है, जो अविनाशी और अनंत है। हमें अपने शरीर को छोड़कर अपनी आत्मा की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि यही हमारे असली और शाश्वत स्वरूप को समझने में मदद करेगा।
इस भावार्थ का अध्ययन करके हमें जीवन में आत्मसाक्षात्कार की महत्वपूर्णता समझने में मदद मिलती है और हमें यह याद दिलाती है कि हमारी असली पहचान हमारी आत्मा में है, जो अनंत और अविनाशी है।