तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ। ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि॥24॥
Translation (HI)
इसलिए क्या करना है और क्या नहीं करना है, यह जानने में शास्त्र ही प्रमाण है। शास्त्रों के अनुसार कर्तव्य जानकर ही कर्म करना चाहिए।
Life Lesson (HI)
धर्म और कर्म की पहचान शास्त्रों से होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि कर्म करने के लिए शास्त्र ही अच्छा मार्गदर्शक है। शास्त्रों में दिये गए नियमों और विधानों का पालन करके ही हमें यह जानने में सहायता मिलती है कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। इसका मतलब है कि हमें अपने कर्मों का निष्कर्ष शास्त्रों के माध्यम से निकालना चाहिए और उन्हें निर्धारित करना चाहिए। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि धर्म और कर्म की सही पहचान शास्त्रों से होती है और हमें इनके अनुसार आचरण करना चाहिए। इसके माध्यम से हम सही और उचित कर्मों का निष्कर्ष निकाल सकते हैं और उसके अनुसार जीवन जी सकते हैं।