जो दान अनुचित समय, स्थान या अपात्र को, अपमानपूर्वक या अवमानना से दिया जाता है — वह तामस दान कहलाता है।
Life Lesson (HI)
सम्मान और विवेक के बिना दिया गया दान अधर्म में आता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि जो दान अनुचित समय, स्थान या अपात्र को, अपमानपूर्वक या अवमानना से दिया जाता है, वह तामस दान कहलाता है। यह दान मानवता और धर्म के सिद्धांतों के विपरीत होता है। इसका अर्थ है कि जब हम किसी को दान देते हैं, तो हमें सम्मान और विवेक का ध्यान रखना चाहिए। दान को अपने अधर्म के रूप में नहीं देना चाहिए।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि दान करते समय हमें उचित समय, परिस्थितियों और व्यक्ति का ध्यान रखना चाहिए। दान का महत्व है, लेकिन वह अच्छे भाव से और सम्मानपूर्वक दिया जाना चाहिए। यह हमें यहाँ सिखाया गया है कि दान के साथ सम्मान और विवेक भी महत्वपूर्ण हैं। इससे हमें समाज में सही तरीके से उपकार करने की महत्वता समझाई जाती है।