हे पार्थ! जो बुद्धि धर्म और अधर्म, क्या करना है और क्या नहीं — इन बातों को यथार्थ रूप में नहीं जानती — वह राजसी बुद्धि है।
Life Lesson (HI)
अविवेकपूर्ण निर्णय हमें भ्रम में डालते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो बुद्धि धर्म और अधर्म को, क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इन मामलों को सही ढंग से समझने में असमर्थ होती है, वह बुद्धि राजसी होती है। इस भावनात्मक विचार से हमें यह समझने को मिलता है कि अविवेकपूर्ण निर्णय हमें भ्रम में डालते हैं। यह श्लोक हमें यह शिक्षा देता है कि हमें सही और उचित निर्णय लेने के लिए अपनी बुद्धि को सुधारना आवश्यक है और अंधविश्वास या अविवेक से दूर रहना चाहिए। इसके माध्यम से हमें सही मार्ग चुनने की महत्वपूर्णता को समझाता है।