हे अर्जुन! ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित है, और अपनी माया से उन्हें यंत्र की भाँति घुमा रहा है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर हर प्राणी के हृदय में स्थित होकर उसकी गति नियंत्रित करता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित हैं, अर्थात् भगवान सभी जीवों का अंतरात्मा हैं और उनकी गति और चाल उन्हीं के नियंत्रण में हैं। भगवान अपनी माया यानी अज्ञान के वेश में रहकर सभी प्राणियों को यंत्र के रूप में घुमाते हैं, अर्थात् उनकी हरकतों का नियंत्रण रखते हैं। इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि भगवान एकाधिकारी हैं और हर जीव की उत्पत्ति और उसकी गति भगवान की इच्छा अनुसार होती है। यह श्लोक हमें यह शिक्षा देता है कि हमें भगवान की इच्छा के अनुसार चलना चाहिए और उनके द्वारा निर्धारित यंत्र में स्वीकार करना चाहिए।