Bhagavad Gita • Chapter 2 • Verse 10

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Chapter 2 • Verse 10

Sankhya Yoga

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत। सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः॥10॥
Translation (HI)
हे भारत! उस विषादग्रस्त अर्जुन से, जो दोनों सेनाओं के बीच स्थित था, हृषीकेश (कृष्ण) ने मुस्कुराते हुए यह वचन कहा।
Life Lesson (HI)
सत्य का मार्गदर्शन करुणा और प्रसन्नता के भाव से ही प्रभावी होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो अर्जुन दोनों सेनाओं के बीच खड़ा है और विषाद की स्थिति में है, उसे उन्होंने हंसते हुए यह वचन कहा। यह दर्शाता है कि सत्य का पालन करने वाले भगवान श्रीकृष्ण कैसे करुणा और प्रसन्नता से अपने शिष्य के प्रति संवेदनशील रहते हैं। इस भाव से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें भी अपने जीवन में करुणा और प्रसन्नता के साथ दूसरों को समझना चाहिए। जीवन में संघर्ष और विषाद आते हैं, लेकिन हमें उनका सामना करने के लिए सकारात्मक भावना और सहानुभूति बनाए रखनी चाहिए। इससे हम अपने आसपास के लोगों की मदद कर सकते हैं और उन्हें संघर्षों से निकलने में सहायता पहुंचा सकते हैं।