श्रीभगवान ने कहा: तुम ऐसे के लिए शोक कर रहे हो जो शोक करने योग्य नहीं हैं, और ज्ञान की बातें कह रहे हो। ज्ञानीजन न मृतकों के लिए शोक करते हैं न जीवितों के लिए।
Life Lesson (HI)
सच्चा ज्ञान जन्म और मृत्यु के बंधन से ऊपर उठाता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कह रहे हैं कि अर्जुन, तुम अनुचित बातों में शोक कर रहे हो। जो कुछ तुम अभी बोल रहे हो, वह ज्ञान की बातें नहीं हैं। ज्ञानी व्यक्ति न तो मरे हुए लोगों के लिए रोते हैं और न ही जीवित लोगों के लिए।
इस श्लोक का महत्वपूर्ण संदेश यह है कि ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि जीवन और मृत्यु एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसके लिए शोक करना निरर्थक है। उन्हें इस अनित्य संसार में अटल आत्मा की प्राप्ति के लिए चिन्ता करनी चाहिए।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि हमें जीवन के परिस्थितियों में आत्मनिर्भर और साक्षात्कारी बनना चाहिए। हमें स्वीकार करना चाहिए कि मृत्यु एक प्राकृतिक घटना है और हमें इससे डरने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, हमें आत्मा की अनन्तता और शाश्वतता को समझना चाहिए और अपने जीवन को इस दृष्टिकोण से देखना चाहिए।