न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्॥12॥
Translation (HI)
क्योंकि न तो मैं किसी काल में नहीं था, न तुम थे और न ही ये राजागण। और भविष्य में भी हम सब नहीं रहेंगे—ऐसा नहीं है।
Life Lesson (HI)
आत्मा शाश्वत है; समय के प्रवाह से उसका कोई विनाश नहीं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुन को स्पष्ट कर रहे हैं कि आत्मा अनन्त है और वह कभी न जन्म लेता है और न मरता है। न तो श्रीकृष्ण कभी नहीं थे, न अर्जुन थे और न ही ये सभी राजाओं के समुदाय थे। और भविष्य में भी ये सब नहीं रहेंगे, इसका अर्थ है कि आत्मा अनन्त है और समय के प्रवाह से उसका कोई नाश नहीं होता।
यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारी आत्मा अनन्त और अमर है। यह समझने से हमें भय और अज्ञान से मुक्ति मिलती है और हम अपने कर्तव्यों को सही दृष्टिकोण से समझते हुए उन्हें निष्काम कर्म के माध्यम से निष्काम भाव से पूरा करते हैं।