श्रीभगवान ने कहा: हे अर्जुन! यह कैसा मोह तुम्हें कठिन समय में आ घेरा है? यह न तो आर्यों के योग्य है, न स्वर्ग देने वाला है और न ही कीर्ति दिलाने वाला।
Life Lesson (HI)
संकट में धैर्य खोना आत्म-विकास में बाधा है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि उनका मन कैसे मोहित हो गया है कि वे इस कठिन समय में अस्थिर हो रहे हैं। इस मोह ने उन्हें उचित कर्मों से भटका दिया है जो न तो आर्यों के योग्य हैं, न स्वर्ग को प्राप्त करने वाले हैं और न ही कीर्ति को प्राप्त करने वाले हैं।
इस श्लोक के माध्यम से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में संकट के समय में भी हमें धैर्य और सहनशीलता बनाए रखनी चाहिए। एक अच्छा व्यक्ति वह है जो कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है और उसके मन को नियंत्रित रखने में समर्थ होता है। इस प्रकार, यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि संकट के समय में धैर्य खोना हमारे आत्म-विकास में बाधा डाल सकता है।