जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया धारण करती है।
Life Lesson (HI)
शरीर परिवर्तन आत्मा के शाश्वत यात्रा का एक चरण मात्र है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण आत्मा की अमरता और शरीर के परिवर्तन की अनित्यता को समझाने के लिए उदाहरण दे रहे हैं। जिस प्रकार साधारण व्यक्ति पुराने वस्त्रों को बदलकर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर धारण करती है। इससे यह समझने को मिलता है कि शरीर का मरण अत्यंत सामान्य है, जबकि आत्मा अनंत है और नित्य है।
देह त्यागकर जीवात्मा नये शरीर में प्रवेश करती है, जिससे यह सिद्ध होता है कि आत्मा अविनाशी और शरीर सांसारिक है। यह श्लोक हमें बताता है कि जीवात्मा नित्य है और शरीर का त्याग करके उसकी अमरता को प्राप्त किया जा सकता है।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि हमें अपने शरीर के अनित्य स्वरूप को समझना चाहिए और आत्मा में निष्ठा रखनी चाहिए। शरीर का नाश निश्चित है, लेकिन आत्मा अजेय और अनंत है। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि हमें आत्मा की महत्वपूर्णता को समझना चाहिए और अपने शरीर के परिवर्तन को एक प्रारंभिक चर