यह आत्मा अव्यक्त है, अचिन्त्य है और विकाररहित है; अतः इसे जानकर तुझे शोक नहीं करना चाहिए।
Life Lesson (HI)
जो न दिखता है, न बदलता है, उसके लिए शोक क्यों?
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को आत्मा के विषय में बताते हैं। वे कहते हैं कि आत्मा अव्यक्त (जिसका रूप दृश्य नहीं है), अचिन्त्य (जिसे मानसिक विचार से समझा नहीं जा सकता) और विकाररहित (जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होता) है। इसलिए, इसे समझकर अर्जुन को किसी भी प्रकार का शोक नहीं करना चाहिए।
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि हमें उस अदृश्य, अचिन्त्य और अविकारी आत्मा को समझने से हमें किसी भी प्रकार के शोक या चिंता की अनिवार्यता नहीं है। हमें आत्मा के अमरत्व और शाश्वत स्वरूप को समझकर जीवन की चुनौतियों और परिस्थितियों के साथ साहसपूर्वक निपटना चाहिए। इस श्लोक से हमें यह भी समझ मिलता है कि जो कुछ दिखता है और परिवर्तित होता है, उसके लिए हमें शोक करने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, हमें आत्मा के अमर और अविकारी स्वरूप के साथ जुड़कर जीवन के सभी पहलुओं को सकारात्मकता और सुन्दरता के साथ स्वीकार करना चाहिए।